
उदयपुर। भारतीय नववर्ष संवत 2082 के शुभारंभ पर रविवार को उदयपुर में उमंग, उल्लास और राष्ट्रप्रेम का अद्भुत संगम देखने को मिला। भारतीय समाजोत्सव समिति के तत्वावधान में निकाली गई भव्य शोभायात्रा में बड़ी संख्या में नागरिकों ने भाग लिया। महिलाएं भी पारम्परिक परिधानों में न केवल शामिल हुईं, बल्कि मंगल गीतों का गुंजार किया। शोभायात्रा संत-महंतों का सान्निध्य में निकली। संत-महंत सजी-धजी बग्घियों में बिराजित रहे। सामाजिक चेतना के संदेश देने वाली झांकियां भी आकर्षण का केन्द्र बनीं।
शोभायात्रा गांधी ग्राउंड से प्रारंभ होकर हाथीपोल, देहलीगेट, बापू बाजार, सूरजपोल, टाउन हॉल होते हुए नगर निगम प्रांगण पहुंची। पूरे मार्ग पर श्रद्धा, आस्था और भक्ति का माहौल बना रहा। शोभायात्रा की विशेषता यह रही कि इसमें मातृशक्ति ने सिर पर मंगल कलश धारण कर मंगलाचार गाते हुए यात्रा की अगुवाई की। स्त्रियों ने पारंपरिक वेशभूषा में नववर्ष की शुभकामनाएं दीं और भव्य कलश यात्रा ने पूरे वातावरण को भक्तिमय बना दिया।
शोभायात्रा के दौरान युवाओं ने भगवा ध्वज लहराकर और जयघोष करते हुए भारतीय नववर्ष का भव्य स्वागत किया। नगर के विभिन्न स्थानों पर जगह-जगह शोभायात्रा का पुष्पवर्षा से स्वागत किया गया। मार्ग में कुछ स्थानों पर विभिन्न समाज-संगठनों की ओर से जलपान की भी व्यवस्था की गई।

शोभायात्रा में विभिन्न धार्मिक और सांस्कृतिक झांकियों ने लोगों का मन मोह लिया। महाकाल, श्रीराम दरबार, मां दुर्गा, भारत माता, पंच परिवर्तन, अहिल्याबाई होल्कर की सेवा समरसता , ग्राम विकास और पर्यावरण संरक्षण, नागरिक कर्तव्य बोध और भारत की प्रगति, प्रयागराज महाकुंभ, स्वावलंबन और साक्षरता अभियान की झांकियां आकर्षण का केंद्र रहीं। शोभायात्रा में अखाड़ों के जांबाजों ने अपने हैरतअंगेज करतब दिखाए, ढोल-नगाड़ों की गूंज और पारंपरिक वाद्ययंत्रों की ध्वनि ने माहौल को और उल्लासमय बना दिया।
झाड़ोल स्थित मांकड़ादेव धाम के गुलाबदास महाराज ने भारतीय नववर्ष समाजोत्सव समिति के तत्वावधान में चल रहे तीन दिवसीय आयोजनों के तीसरे दिन शोभायात्रा के पश्चात् टाउन हॉल में आयोजित धर्म सभा में उन्होंने अपने ओजस्वी उद्बोधन में कहा कि आज मेवाड़ में एक महाकुंभ का दृश्य दिखाई दे रहा है, जहां समाज जागरूक हो रहा है और अपनी सांस्कृतिक धरोहर को संजोने के लिए प्रतिबद्ध हो रहा है। उन्होंने कहा कि यदि हम संगठित नहीं होंगे तो कोई भी हमारे महापुरुषों पर अनर्गल टिप्पणियां कर सकता है। इसीलिए हमें सतत जागरूक रहना होगा और अपने धर्म व संस्कृति की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध रहना होगा। उन्होंने कहा कि आने वाली पीढ़ी को धर्म की सुदृढ़ नींव पर स्थापित करना हमारा कर्तव्य है। इसके लिए उन्होंने शास्त्र और शस्त्र दोनों को धारण करने की आवश्यकता बताई। उन्होंने कहा कि बच्चों के सर्वांगीण विकास के लिए संघ की शाखा उत्तम विकल्प है जहां नैतिकता, वीरता और आध्यात्मिकता की शिक्षा दी जाती है।

एकता और आत्मबल को सशक्त कर धर्म और समाज की रक्षा के लिए रहें कटिबद्ध – सुदर्शनाचार्य
-सभा में बड़ीसादड़ी स्थित गोपाल पुरुषोत्तम आश्रम के पीठाधीश सुदर्शनाचार्य महाराज ने कहा कि सनातन धर्म की आलोकित आभा एक बार फिर समाज को जागरूक कर रही है। उन्होंने कहा कि समय परिवर्तनशील है। अब वह घड़ी आ चुकी है जब हिंदू समाज अपने मूल धर्म और संस्कृति की ओर पुनः जागृत हो रहा है। कभी लोग अंग्रेजी नववर्ष को बड़े हर्षोल्लास से मनाते थे, किंतु अब परिस्थितियां बदल रही हैं। आज हिंदू समाज अपने सनातन नववर्ष को पूरे उत्साह और श्रद्धा से मना रहा है। उन्होंने समाज को एकजुट होने का आह्वान किया और कहा कि इतिहास हमें सिखाता है कि जब हम संगठित रहते हैं, तभी अपनी सभ्यता और संस्कृति की रक्षा कर पाते हैं। उन्होंने देवराज कांड और कन्हैयालाल कांड जैसे दुखद प्रसंगों का उल्लेख करते हुए कहा कि हमें इन घटनाओं से सबक लेने की आवश्यकता है। हमें अपनी एकता और आत्मबल को सशक्त कर अपने धर्म और समाज की रक्षा के लिए कटिबद्ध रहना होगा।
इन संतों का भी रहा सान्निध्य
-भारतीय नववर्ष समाजोत्सव समिति के संयोजक डॉ. परमवीर सिंह दुलावत ने बताया कि धर्मसभा में सोमेश्वर आश्रम सेक्टर-5 के संत राम प्रताप, चतुरभुज हनुमान हरिदासजी की मगरी के महंत इंद्रदेव दास, रामद्वारा धोलीबावड़ी के महंत दयाराम, कल्लाजी धाम बोहरा गणेशजी के महंत नारायण दास, सर्वेश्वर आश्रम सवीना के महंत राधिका शरण, कल्लाजी धाम सेक्टर-14 के महंत हेमंत जोशी, इस्कॉन मंदिर भूपालपुरा के महंत मैत्रेय दास, ओम बन्ना धाम बलीचा के गादीपति रवीन्द्र बापू, धानमण्डी सगसजी कल्याण शक्तिपीठ के सुशील चित्तौड़ा, दक्षिण मुखी बालाजी मंदिर आचार्य मैत्रीस चाणमइ (थाईलैंड), संत विजय दास, राम लक्ष्मण मंदिर घाणेराव घाटी की साध्वी सूरजदास, रंगीला भैरूजी खेरादीवाड़ा के महंत लाल सिंह, देहलीगेट नरसिंहजी मंदिर के महंत ओम दास, पंचमुखी बालाजी राठौड़ों का गुड़ा के महंत ईश्वरदास का भी सान्निध्य रहा।
प्रकाश माली के भजनों से भक्तिमय हुआ वातावरण
-धर्मसभा के बाद प्रख्यात भजन गायक प्रकाश माली ने अपनी मधुर वाणी और भक्ति से ओतप्रोत सुरों से श्रोताओं को भाव-विभोर कर दिया। भजन संध्या में उनकी मंत्रमुग्ध कर देने वाली प्रस्तुतियों ने श्रद्धालुओं के हृदय में आध्यात्मिक ऊर्जा का संचार किया। उन्होंने “जय जय राजस्थान” से कार्यक्रम की शुरुआत कर जनमानस में जोश और गौरव का संचार किया। इसके पश्चात “सदगुरु आया पावना” की मधुर स्वर लहरियों ने सभी को भक्ति रस में सराबोर कर दिया। उनकी सुमधुर आवाज में “गोरी के नन्दा गजानन” का गुणगान सुनकर श्रद्धालु भावविभोर हो उठे। वहीं “राम मेरे घर आना” ने पूरे माहौल को भक्तिमय बना दिया। जब उन्होंने “मेरा रंग दे बसंती चोला” गाया तो समूचा पंडाल देशभक्ति की भावना से ओतप्रोत हो उठा। उनके हर भजन पर श्रद्धालु झूम उठे और तालियों की गड़गड़ाहट से सभागार गूंज उठा। प्रस्तुतियों के दौरान प्रकाश माली ने कहा कि भजन केवल संगीत नहीं, बल्कि आत्मा की गहराइयों से निकला एक भावनात्मक प्रवाह होता है।
प्रतिभाओं को पारितोषिक वितरण
-आरंभ में समिति के पालक विष्णु शंकर नागदा ने कार्यक्रम एवं नववर्ष की भूमिका रखी। कार्यक्रम में स्थानीय प्रतिभा प्रकटीकरण के निमित्त होने वाले कार्यक्रम के प्रतिभागियों को संत गुलाब दास महाराज, संत राम प्रताप महाराज व अन्य ने प्रशस्ति पत्र एवं स्मृति चिह्न प्रदान किए। कार्यक्रम का संचालन विकास छाजेड़ एवं विष्णु मेनारिया ने किया।